मानव भूगोल प्रकृति व विषय क्षेत्र Human Geography nature and scope
मानव भूगोल का अर्थ एवं परिभाषा
भूगोल पृथ्वी को मानव का घर समझते हुए उन सभी तत्वों का अध्ययन करता है जिन्होंने मानव को पोषित किया है। इसमें प्रकृति और मानव के अध्ययन पर जोर दिया जाता है। यह दोनों अविभाज्य तत्व है और इन्हें समग्रता की साथ देना चाहिए।
भूगोल को मुख्यतः दो भागों में बांटा जा सकता है। भौतिक भूगोल और मानव भूगोल
भौतिक भूगोल
भौतिक भूगोल भौतिक पर्यावरण का अध्ययन करता है।
मानव भूगोल
मानव भूगोल भौतिक पर्यावरण व सांस्कृतिक पर्यावरण के बीच संबंध, माननीय परिघटनाओं के स्थानिक वितरण एवं संसार के विभिन्न भागों में सामाजिक और आर्थिक विविधताओं का अध्ययन करता है।
इस कविता के माध्यम से मानव भूगोल और उसके क्षेत्र को समझा जा सकता है:-
"मानव भूगोल में मानवीय तथ्यों का अध्ययन आता है। यह मानव पर्यावरण के मध्य अंतर संबंधों को बताता है।।
कृषि, पशुपालन, उद्योग, व्यवसाय किए जाते हैं।
परिवहन, संचार और व्यापार इसके अंदर आते हैं।"
मानव भूगोल का प्रादुर्भाव और विकास मुख्य थे 18वीं शताब्दी में माना जाता है।
आधुनिक मानव भूगोल के जन्मदाता जर्मन भूगोलवेत्ता फैडरिक रेटजेल ने अपनी पुस्तक एंथ्रोपॉ जियोग्राफी के अनुसार:- "मानव भूगोल मानव समाज और धरातल के बीच संबंधों का संश्लेषित अध्ययन है।"
रेटजेल की शिष्या और प्रसिद्ध अमेरिकन भूगोलवेत्ता (नियतिवाद समर्थक) एलन सैंपल के अनुसार :- "मानव भूगोल चंचल मानव और अस्थाई प्रति के पारस्परिक परिवर्तनशील संबंधों का अध्ययन है।"
संभववाद के जन्मदाता फ्रांसीसी भूगोलवेता विडाल डी ला ब्लाश के अनुसार "मानव भूगोल पृथ्वी और मानव के पारस्परिक संबंधों को एक नया विचार देता है। जिसमें पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा पृथ्वी पर निवास करने वाले जीवो के पारस्परिक संबंधों का अधिक संश्लिष्ट ज्ञान शामिल है।"
डिकेन और पिट्स के अनुसार मानव भूगोल :- "मानव और उसके कार्यों को समाविष्ट किया है।"
परिभाषाओं का सारांश
मानव भूगोल में विज्ञान है जिसमें पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रों में मानव समूहों के प्राकृतिक और सांस्कृतिक वातावरण की शक्तियां प्रभाव व प्रतिक्रियाओं के पारस्परिक संबंधों और स्थानिक संगठन का अध्ययन मानवीय प्रगति के उद्देश्यों से प्रादेशिक आधार पर किया जाता है।

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